केडीके न्यूज़ नेटवर्क 

भिवंडी। न्यायिक हिरासत में पिछले शनिवार को आधारवाड़ी जेल भेजे गए भिवंडी मनपा के कर मूल्यांकन विभाग के तीनों कर्मियों में प्रभारी कर मूल्यांकन अधिकारी सुदाम नारायण जाधव और श्रीमती सायरा बानो रफीउज्जमा अंसारी की जमानत आज बुधवार को गई। जबकि एक आरोपी लिपिक किशोर शिवराम केणे का जमानत आर्डर कल निकलेगा। लेकिन जाधव और श्रीमती अंसारी का जमानत आर्डर देर शाम जारी होने के कारण अब वे कल गुरूवार की सुबह जेल से बाहर आ पाएंगे। लेकिन इस बीच कथित तौर पर इस रिश्वत कांड लीपापोती कराने में राज्य के CM शिंदे के ख़ास आदमी का नाम आने पर अब यह मामला हाई प्रोफाईल बनता जा रहा है। 

         सूत्रों का दावा है कि इस मामला को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो की नवी मुंबई की टीम ने कदाचित 4 जनवरी की शाम मनपा आयुक्त अजय वैद्य को भी नोटिस जारी किया था। जिसके तुरंत बाद मनपा आयुक्त वैद्य राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सबसे खास आदमी की शरण में चले गए। जो इन्हें CM शिंदे द्वारा भिवंडी मनपा का आयुक्त बनवाया था। जिसके हस्तक्षेप के बाद 4 जनवरी को ही रातो-रात यह मामला एंटी करप्शन ब्यूरो की नई मुंबई की शाखा से लेकर कार्य क्षेत्र के बहाने एंटी करप्शन ब्यूरो की ठाणे यूनिट को सौंप दिया गया। जिससे आयुक्त वैद्य के ऊपर आ रही भ्रष्टाचार की आंच पर पानी डाला जा सके। इतना ही नहीं बिरले ही ऐसा होता है कि पुलिस कस्टडी के दौरान केस का विवेचना अधिकारी (आईओ) बदल जाता हो। लेकिन इस मामले में चलती केस में जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान इस केस के विवेचना अधिकारी (IO) एंटी करप्शन ब्यूरो (नवी मुंबई) के पुलिस निरीक्षक संतोष पाटिल को बदलकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ठाणे के पुलिस उपाधीक्षक प्रमोद जाधव को IO बनाकर इस केस की विवेचना उन्हें सौंप दी गई। इस मामले को लेकर जब ‘ख़बर-दर-ख़बर’ ने इस केस से जुड़े भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एक अधिकारी से इस मामले में मनपा आयुक्त वैद्य की भूमिका और नोटिस को लेकर बात किया तो उन्होंने इस मामले को ‘इंवेस्टिगेशन प्रोसेस’ का बताकर कुछ भी कहने से मना कर दिया। सूत्र बताते हैं कि इन दिनों मनपा आयुक्त वैद्य इतने परेशान हैं कि इस मामला को सुलटाने के लिए भिवंडी के एनसीपी के एक बड़े नेता को भी कल फोन किया था। यहां लोगों के बीच इस बात की जबरदस्त चर्चा है कि मुख्यमंत्री शिंदे को आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी भिवंडी मनपा को जहां भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाना चाहिए। वहीं इसके विपरीत उनका ख़ास आदमी उन्हीं के दम पर भ्रष्टाचारियों को प्रश्रय देने जुटा है। ‘ख़बर-दर-ख़बर’जनहित में राज्य की शिंदे सरकार से मांग करता है कि मनपा आयुक्त वैद्य को त्वरित हटाकर कर इस प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराई जाए। ताकि इस कांड को लेकर लोगों के बीच चल रही तरह-तरह की चर्चाओं पर विराम लग सके। 

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